NAVRATRI – AAI SHREE SONAL MA

नवरात्री पूजन अने उजवणी माटे प.पू.आईश्री सोनल मां  कह्यु छे के,                

भाग-2

“नवरात्री ऐ नवदुर्गाओनुं पर्व छे. चंडीपाठना देवी कवचमां नव दुर्गाओना नाम आप्या छे (1)शैलपुत्री, (2) ब्रह्मचारिणी, (3) चंद्रघटा, (4) कुष्मांडा, (5) स्कंदमाता, (6) कात्यायनी, (7) कालरात्रि, (8) महागौरी, (9) सिद्धिदात्री.    

आ नव दुर्गाओ ऐटले भगवतीनां जुदां जुदां नव रूप बने. नवरात्रीमां दररोज ऐक ऐक रूपे भगवतीनी पूजा करवामां आवे छे. झीणवटथी जोईऐ तो आ नवे रूपमां बाईउना जीवननी टूंकी रूपरेखा प्रतिबिंब खेंचवामां आवेल छे,

(1) शैलपुत्री ऐटले हिमालयना दीकरी पार्वती. ऐनुं पूजन ऐटले नानपणथी पर्वतमां वसवा जेवी कठोर तालीम अने सहन शकित केळववी.

(2) ब्रह्मचारिणी ऐटले कुमारी अवस्थामां मन, वचन, कर्मथी पूर्ण ब्रह्मचर्य.


(3) चंद्रघटा ऐटले चंद्र जेनी घंटडीमां छे. ऐटले जेनी वाणीमां चंद्रनुं अमृत, अवाजमां घंटडीनो रणकार, घरेणां कपडा, खानपानमां चंद्रनी शीतळता

(4) कुष्मांडा – दुनियाना त्रणे ताप, आधि, व्याधिने पचावे, संसार वहेवारमां झेर जीरवे ते कुष्मांडा.

(5) स्कंदमाता – देव सेनापति कार्तिकय जेवा पराक्रमी दीकराओनी मां.

(6) कात्यायनी – यज्ञ, दान, पुन्यनां दैवी कामो करवा माटे ऋषिकुळनी परंपरा चलावनारी.

(7) कालरात्रि – र्दुष्टो, अत्याचारीओने काळरात्री जेवी भयंकर.

(8) महागौरी – व्रत, नियम, तपथी  शुद्ध अने उजळी.

(9) सिद्धिदात्री – रिद्ध सिद्ध देवाने शकितमान पावनमूर्ति.

आपणा आईओ सिध्धिदात्रीओ बनेला, बाळपणाथी बुढापा सुधीमां नवदुर्गाना नवे रूपनी परीक्षामांथी पास थयेला. आपणी बाई, बहेनो, दीकरीओ जो ऊपर प्रमाणे नानपणथी ज नवदुर्गानी रहेणी करणी पाताना जीवनमां उतारे, तो भेळीयाळीओनी खोट न रहे ने साचुं चारणपणु प्रगटे.                             

पूर्ण

संदर्भ :- मातृदर्शन लेखकश्री पिंगळशीभाई पायक

वंदे सोनल मातरम्

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